Thursday, September 10, 2020

हुमा कुरैशी के टेढ़े सवाल पर अक्षय कुमार ने किया खुलासा- रोज सुबह गोमूत्र पीता हूं, इसके पीछे आयुर्वेद है September 10, 2020 at 03:30PM

अक्षय कुमार इन दिनों स्कॉटलैंड में हैं। इस बीच उन्होंने 'बेल बॉटम' में अपनी को-स्टार हुमा कुरैशी के साथ एक इंस्टाग्राम पर लाइव आए। इस लाइव चैट में उनके साथ बियर ग्रिल्स भी थे। इसी सेशन के दौरान जब हुमा ने अक्षय से पूछा आखिर हाथी के मल से बनी चाय पीने तैयार कैसे हुए, तब अक्षय ने खुलासा किया कि वे रोज गोमूत्र पीते हैं, इसलिए यह करना उनके लिए आसान था।

प्रिव्यू में बताया था कैसे बनाई थी पूप टी

अक्षय ने बताया कि वे इसको लेकर चिंतित नहीं थे। हालांकि वे इसके लिए बेहद एक्साइटेड थे। अक्षय ने बताया मैं आयुर्वेदिक कारणों के चलते हर रोज गोमूत्र पीता हूं, इसलिए यह मेरे लिए ज्यादा मुश्किल नहीं था। अक्षय और बियर ग्रिल्स इन टू द वाइल्ड की शूटिंग के दौरान हाथी के मल से बनी चाय पी थी, जिसको लेकर हर कोई हैरान था। हालांकि शो के प्रिव्यू में बियर कहते हुए सुनाई दिए थे कि हाथी के मल की चाय को 100 प्रतिशत तक उबाल दिया जाए तो वह पीने लायक हो जाती है।

रणवीर ने किया मूंछों पर मजेदार कमेंट

इन टू द वाइल्ड का यह एपिसोड बियर और अक्षय ने बांदीपुर टाइगर रिजर्व कर्नाटक में शूट किया था। शो 11 सितंबर को रात 8 बजे टेलीकास्ट किया जाएगा। करीब 27 मिनट के इंस्टाग्राम लाइव में अक्षय और बियर ने शूटिंग से जुड़े अपने एक्सपीरियंस शेयर किए। इसी दौरान रणवीर सिंह ने उनकी मूंछों पर कमेंट किया। जिस पर अक्षय ने बताया कि फैमिली को उनका यह लुक पसंद नहीं आया।



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Akshay Kumar revealed in an instagram live with Huma Qureshi that he drinks cow urine daily for Ayurvedic reasons

सुमित व्यास के अनुसार इंसान की प्रवृत्ति में ही नेपोटिज्म है, हम हमेशा लोगों के सामने रहते हैं इसलिए ध्यान ज्यादा जाता है September 10, 2020 at 02:30PM

सुमित व्यास छह साल पहले से वेब सीरीज करते आ रहे हैं, तब उनको वेब सीरीज की इतनी ताकत का अंदाजा नहीं था। हाल ही में उनकी एक नई वेब सीरीज 'वकालत फ्रॉम होम' अमेजन प्राइम पर स्ट्रीम हुई है। जिसे लॉक डाउन में शूट किया था। इसके अलावा कुछ दिन पहले ही वो एक बेटे के पिता भी बने हैं। इस मौके पर उन्होंने अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ से जुड़ी खास बातें दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में शेयर कीं।

लॉक डाउन में वेब सीरीज शूट करने की क्या सुविधा-असुविधा रही?

सुमित- लॉक डाउन के दौरान फिजूल की चीजों में दिमाग लगाने के बजाय हमने यह कहानी कह दी, यह सबसे बड़ा अचीवमेंट रहा। दिन के चार-पांच घंटे हम लोग कहानी पर काम करते थे, रोजाना रिहर्सल करते थे। वक्त का सही इस्तेमाल हुआ। असुविधा वास्तव में कुछ भी नहीं रही और देखा जाए तो हमने एक नया माध्यम डिस्कवर किया। ऐसा पहले कभी हुआ नहीं था कि जूम पर रिकॉर्डिंग करके सीरीज बनाई जाए।

लॉक डाउन में सीरीज बनाने का ख्याल कैसे आया?

सुमित- इसके राइटर ने अखबार में पढ़ा कि लॉक डाउन के दौरान कोर्ट की प्रोसेस चालू रहेगी। कोई डिवोर्स केस था, उसकी हियरिंग जूम पर हो रही थी। उन्हें शो के लिए यह बहुत इंटरेस्टिंग आइडिया लगा। यहीं से 'वकालत फ्रॉम होम' की शुरुआत हुई।

इसमें किस तरह की वकालत कर रहे हैं?

सुमित- असल में वकालत नहीं कर रहा हूं। मैं जो किरदार प्ले कर रहा हूं, उसका डिवोर्स चल रहा है। उनका नाम है- सचिन कोहली। सचिन मुंबई में एक्टिंग फील्ड में स्ट्रगलिंग कर रहा है। वो मान रहा है कि अभी तक उसका एक्टिंग में कुछ खास नहीं हुआ है। उसकी कोशिश जारी है। वो साथ ही साथ साइड बिजनेस करता है, जिससे उसका खर्चा चलता है। लेकिन बीवी को बताता नहीं है कि पैसे कहां से आ रहे हैं। एक दिन वो किसी सिचुएशन में फंस जाता है, तब कई दिनों तक घर नहीं आता है। फिर तो बीवी का शक गहरा हो जाता है। दोनों के बीच झगड़े हो जाते हैं और बीवी कोर्ट में केस फाइल कर देती है। यह पूरी कहानी डिवोर्स केस पर है।

आपका किरदार बीवी से बातें छिपाता है। रियल लाइफ में कितनी बातें पत्नी एकता से छिपाते और कितनी बताते हैं?

सुमित- मैं बहुत ज्यादा बातें नहीं छिपाता हूं। मेरी प्रॉब्लम यह है कि मेरे पेट में बहुत देर तक बात टिकती नहीं है। मुझसे अगर कहा जाता है कि इस बात को किसी से नहीं कहना है तो वो बात हंड्रेड पर्सेंट मेरे मुंह से निकल ही जाएगी। मैं छिपाना चाहता हूं, पर छिपा नहीं पाता। खुद ही एक-दो दिन में बोल देता हूं।

जीवन में वेद व्यास के आने से किस तरह से परिवर्तन आया है?

सुमित- कह सकते हैं कि हमारी विचारधारा में कुछ परिवर्तन जरूर आया है। सबके साथ कुछ लेवल पर ऐसा होता होगा कि आपको अपना बच्चा सबसे प्यारा लगता है। पहले ऐसा लगता था कि इतना नाम कमा लूंगा, पैसे कमा लूंगा, इतनी फिल्में कर लूंगा, लेकिन जब जीवन में बच्चा आ जाता है, तब लगता है कि इसके अलावा और भी जिम्मेदारी हैं। जीवन की इच्छाएं सेकंड स्टेज पर चली जाती हैं और बच्चा पहला स्थान ले लेता है।

कहते हैं जीवन में बच्चा आने के बाद बीवी का प्यार भी बंट जाता है। आपका क्या कहना है?

सुमित- बिल्कुल बंट गया है। अभी बीवी बच्चे के साथ उसके ननिहाल जम्मू गई हुई है। मुझे नहीं लगता है कि अभी मेरी बहुत ज्यादा याद उन्हें आ रही होगी, क्योंकि उनके आसपास बच्चा और मायके वाले हैं। मैं भी थोड़ा रुका हुआ हूं कि वो नहीं है तो लोगों के साथ मीटिंग कर पा रहा हूं, जबकि वो था, तब किसी से मिल नहीं पाता था। डर लगता था कि बच्चे को कहीं वायरस न लग जाए।

न्यू नॉर्मल में किस तरह से एक्टिव हुए हैं?

सुमित- मैं पहले से ही एक्टिव हूं, क्योंकि जहां मैं रहता हूं वहां पर सूनसान रास्ता है। वहां पर अर्ली मॉर्निंग पैदल चलता था, जब कोई आता-जाता नहीं था। जूम पर कई सारी मीटिंग करता रहता था। लिखता भी हूं तो साथ ही साथ उसका भी काम चल ही रहा है। राइटिंग फ्रंट पर अभी एक फिल्म है, उसे डेवलप कर रहा हूं। वो अभी अर्ली स्टेज पर है। डेवलप हो जाए तो उस बारे में ज्यादा बात कर पाऊंगा।

आगे कौन से प्रोजेक्ट में दिखेंगे?

सुमित- अभी तो 'वकालत फॉर्म होम' ही आ रहा है। हॉटस्टार के लिए एक सीरीज की थी। उसका पोस्ट प्रोडक्शन चल रहा है। मेरे ख्याल से वो अगले साल आएगी। वो एक वॉर सीरीज है। इंडिया और चाइना की जो वॉर हुई थी, उस पर आधारित है। इसमें काफी गुस्सैल किरदार निभा रहा हूं। इसे करने का एक नया अनुभव रहा।

इन दिनों इंडस्ट्री में नेपोटिज्म और ड्रग्स की चर्चा जोरों पर है। इन बातों से आप कितना इत्तेफाक रखते हैं?

सुमित- पर्सनली मुझे इन चीजों से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। हमारी इंडस्ट्री मीडिया इंडस्ट्री है। हम लोग हमेशा लोगों के सामने रहते हैं, इसलिए हम पर लोगों का ध्यान ज्यादा जाता है। एक बहुत सरल उदाहरण देता हूं। एक किराने की दुकान पर वर्षों से रोजाना आलू-प्याज और अनाज की बोरियां बंदे उठाकर रखते रहते हैं। बेचारे भागदौड़ करते हैं, लेकिन जब किराने की दुकान के मालिक का बेटा बड़ा हो जाता है, तो गल्ले पर बेटा ही बैठता है। वो नहीं बैठता है, जो सालों से रोजाना बोरियां उठा रहा है। तो नेपोटिज्म वहां भी है।

क्या है कि इंसान की प्रवृत्ति में ही नेपोटिज्म है। अब यहां की बात होती है तो लोगों का ध्यान ज्यादा जाता है। एक डायरेक्टर का अपने बच्चे को लेकर फिल्म बना देना उतना हानिकारक नहीं है, जितना एक नेता अपने बच्चे को नेता बना दे और वो नेता देश की नीतियां बदले। अगर वह काबिल न हुआ तो उससे समाज को बहुत ज्यादा फर्क पड़ेगा। वो नेपोटिज्म बहुत ज्यादा डरावना है। रही बात बुरी आदतों की तो वो तो सभी को रहती है।



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Sumit Vyas said- Nepotism is in human tendency, we are always in front of people's eyes, so their attention gets more.

नीना गुप्ता बोलीं- 'बधाई हो' ने मेरी जिंदगी बदल दी, अब मसाबा की मां बनने की उम्र है मैं बच्‍चे कहां से पैदा करूं September 10, 2020 at 02:00PM

नीना ने ‘बधाई हो’ से अपनी दूसरी पारी की दमदार शुरूआत की है। वे एक बार फिर से अपने पहले प्‍यार यानी फिल्‍मों को पूरा वक्‍त दे रहीं हैं। इन दिनों वे अपनी फिल्म 'मसाबा-मसाबा' को लेकर चर्चा में है, जो कि एक प्रमुख ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई है। ये फिल्म उनकी और उनकी बेटी मसाबा की स्टोरी पर बेस्ड है। इस मौके पर उन्‍होंने अपनी जिंदगी की कुछ दिलचस्‍प यादें भास्कर के साथ शेयर कीं।

दोबारा प्‍यार के बंधन में कैसे बंधी?

नीना- हम प्‍लेन में मिले थे। मैं लंदन से मुंबई आ रही थी। प्‍लेन दिल्‍ली होते हुए मुंबई आ रही थी। वो दिल्‍ली बेस्‍ड हैं। वहीं से उन्‍हेांने सेम फ्लाइट मुंबई के लिए ली। ये किस्‍मत की ही बात थी। तभी मैं किस्‍मत में काफी यकीन करती हूं। वो पीछे वाली सीट पर थे। मेरी बगल में एक लेडी थी। लेडी ने उनसे सीट एक्‍सचेंज की। वो मेरे बगल में आ बैठे।

वो दिन है और आज का दिन है, वो हमेशा मुझे सुनाते रहते हैं, 'तूने मुझे फंसाया।' उस पर मैं उनसे कहती हूं कि 'मैंने कहां फंसाया, तुमने ऐसा किया।' हालांकि अब मैं नहीं लड़ती। कह देती हूं, 'हां फंसाया। तुम दुखी हो तो जाओ, तुम सुखी हो तो रहो।' ऐसी मीठी नोंकझोंक होती रहती है।

‘बधाई हो’ में आपके किरदार ने गुड न्‍यूज दी थी। असल जिंदगी में भी ऐसा कोई प्‍लान?

नीना- अरे नहीं। अब मसाबा के बच्‍चे पैदा करने का टाइम आ रहा है। मैं कहां से बच्‍चे पैदा करूं?

क्‍या कभी आप भी ऑडिशंस में रिजेक्‍ट हुईं हैं हाल फिलहाल में?

नीना- जी हां। सच कहूं तो ज्‍यादातर ऑडिशनों में मैं फेल हो जाती हूं। ‘बधाई हो’ के लिए मैंने ऑडिशन नहीं दिया था। बहुत सी फिल्‍मों का खासकर फॉरेन प्रोडक्‍शंस में जब कभी ऑडिशन देती रही, उनमें नहीं होता रहा। पता नहीं ऐसा क्‍यों रहा? अब क्‍या ही बोलूं, जिसे कास्‍ट करना होगा करेगा। बाकी लोगों ने मेरी एक्टिंग तो देख ही ली है। शक्‍ल सोशल मीडिया पर देख ही लेते हैं। और क्‍या देखना है?

‘जाने भी दो यारो’ इतनी बड़ी हिट रहेगी कोई अंदाजा था?

नीना- 'ना-ना। कतई नहीं। वो तो बड़ी गरीबी में बनी हुई फिल्‍म थी। किसी के पास पैसा नहीं था तब। ऑटो रिक्‍शा पकड़कर शूट करने जाती थी। अपना खाना बनाकर ले जाती थी। कन्वेंस के पैसे भी नहीं होते थे। एनडीएफसी की फिल्‍म थी। काफी कम बजट था। तब मैं न्‍यूकमर थी। फिर भी पहली ही फिल्‍म में कमाल के एक्‍टर्स के साथ काम करने को मिला। आज जब देखती हूं तो पाती हूं कि हमने कभी ऐसा एक्‍सपेक्‍ट नहीं किया था।'

किस फिल्‍म ने दोबारा से जिंदगी बदलकर रख दी?

नीना- 'बधाई हो' उस फिल्‍म ने मेरी इमेज बदलकर रख दी। उससे पहले मेकर्स मेरे बारे में सोच ही नहीं पाते थे। वो इसलिए कि मीडिया ने मेरी इमेज ही कुछ ऐसी बना दी थी। इमेज के हिसाब से ही रोल मिलते थे। पहले काम मांगने में झिझक होती थी। अब पूरे आत्‍मविश्‍वास के सा‍थ काम मांगती हूं।

मैं तो अमित शर्मा से बोला करती हूं कि वो जो बोलेंगे, वो करूंगी। जूते तक साफ कर लिया करूंगी। कुछ भी कर लिया करूंगी, क्‍योंकि उस इंसान ने मेरी जिंदगी बदल दी। वो बेचारे हालांकि नीना मैम, नीना मैम करते रहते हैं। उस इंसान के लिए मेरे मन में इतनी कृतज्ञता है कि क्‍या कहूं, इसलिए भी उस फिल्‍म से मुझे बहुत प्‍यार है। मेरे ख्‍याल से वो मेरे करियर की सबसे बेहतरीन की गई और देखी हुई फिल्‍म है।'



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Now is the age to become a mother of Masaba, where can I produce children: Nina Gupta

Wednesday, September 9, 2020

Shibani calls Ankita 'princess of patriarchy' September 09, 2020 at 07:34PM

Ankita Lokhande shared a long post on Wednesday evening where she slammed haters and also shared her stand on Sushant Singh Rajput's death probe. Responding to the post, Rhea's friend Shibani Dandekar has slammed Ankita by terming her the 'princess of patriarchy'.